Friday, May 22, 2009

चोट

रात भर सो ना सका मैं तेरी याद में
देखता रहा बस तेरी उस मृत शरीर को,
मंडराने लगे वो सारे पल आँखों के सामने एक-एक करके
जो गुजारे थे मैंने कभी तेरे साथ |

Orkut की वो खुली हुई scrapbook,
Facebook पर खेले वो सारे time-pass games,
Gtalk की वो ping-ping की आवाज़,
Messenger की वो smileys और वो नशीली लाल backgrounds,

CS की वो go-go-go,
AOE की वो भोंपू ,
Mario की वो उछल-कूद,
Taken की वो घटिया graphics,

50 cent और linkin park के वो romantic numbers,
Avril की वो मरी हुई आवाज़,
Blue Ray की वो 8 Gb की movies,
HIMYM, PB, Heroes, F.R.I.E.N.D.S की वो धडाधड sequels,

TS के समय की वो slides,
लोगों के कारनामों की वो print screens,
Paint पर बनाये वो सारे claasy art works,
Photoshop के वो सारे तिकड़म,

याद तो आये पर निकल गए एक-एक करके
पलकों में से आंसुओं के रूप में,
फिर सोचा हंसते-हंसते विदा करूँगा उसे
जिसने हमेशा साथ निभाया अपने उस जीवित रूप में |

देखता रहा, कभी उस काले हो चुके ENTER को,
तो कभी उस USB mouse को,
भूख तक bore होकर चली गयी थी जब
सुबह 6:13 को एक काले प्राणी ने कमरे में दर्शन दिया,

बोलना शुरू किया उसने
"रात भर सोया नहीं है क्या, आँखें लाल हैं तेरी
अच्छा सुन, तेरे Invertor का plug निकाल दिया था मैंने कल
लगा लियो उसे" |

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