Friday, May 15, 2009

आंसू

आंसू भी सूखने लगे हैं अब
धीरे धीरे नींद भी आने लगी है,

lawn में लगा वो कटहल का पेड़
अब फल देने लगा है,
बीतते हुए हर मौसम के साथ
वो भी तुझे अब भूलने लगा है,
12 साल पहले किसने उसे जीवन दिया था
शायद ही याद होगा उसे अब |

Drawimg room के tea-table के उपर रखी वो कलम
जिसकी स्याही शायद ही कभी सूखती थी,
उसकी nib कहीं खो गयी है
उसकी जगह तो अब भी नहीं बदली है,
पर तेरे लिए लिखे उन सारी कविताओं की खुशबू
अभी भी बाकी है उसमें |

album की सारी तस्वीरें अब धुंधली पड़ने लगी हैं
जिनमें हम साथ देखते थे कभी,
काई सी जमने लगी है हर एक पन्ने के कोने पर
कागज़ को छूने से भी थोड़ा-थोड़ा डरने लगा हूँ मैं अब,
कहीं अलग होकर बिखर ना जाए ज़मीं पे
कुछ कुछ खोने सा लगा हूँ मैं अब |

तेरी काजल की डिबिया वहीँ टेबल के उपर रखी हुई है,
कोने की दिवार से सटकर, पड़े पड़े अब धूल की मेहमान बनी हुई है,
ढ़लते हुए हर दिन के साथ
जब इस कमरे में बत्तियां जलाने आता हूँ,
उसके एक-एक हिस्से को देखकर लगता है जैसे
तुझे भूलने की कोशिश कर रही हों |

शीशम से बनी उस shelf में रखी उन
Tagore की किताबों के बीच, कांच पर कभी कभी
तेरी परछाई दिखाई देती थी,
आँखों से आंसू निकल आया करती थी,
रातों को नींद तो साथ छोड़ ही दिया करती थी,
दिन में पलकें भी झपकना बंद दिया करतीं थीं |

पर अब तो मेरी धड़कन तक तुझे भूलने लगी है,
ना जाने क्यों, धड़कना बंद कर दिया है उसने
आंसू तो सूखने ही लगे हैं,
धीरे-धीरे नींद भी आने लगी है अब |

2 comments:

  1. कुछ लम्हे जो याद बना करते है
    या तो अन्सुं
    या मुस्कान
    दिया करते है ....
    उन आसुओ को पिए
    इंसान जब
    मुस्कान का सहारा लिया करते है
    तब वो दुसरो को दुखयारी कह
    ज़माने को खुश होने का
    सबूत दिया करते है

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